लोग मिल के बिछड़ रहे साहिब
हाथ फिर से पकड़ रहे साहिब
जीत कर वो हमें जमाने से
अब हमीं से झगड़ रहे साहिब
दौर अब तो बदल रहा सच में
गाँव भी अब उजड़ रहे साहिब
जिस्म कब तक भला खिलेगा यूँ
झूठ में वो अकड़ रहे साहिब
सच सुनो झूठ बोलने वाले
इश्क़ में लोग लड़ रहे साहिब
— Ranjan Kumar Barnwal















