पलकें झुका के देखना, है दिल-लगी
ज़ुल्फ़ें हटा के देखना, है दिल-लगी
कह दो, हमें हो जानते तुम भी सनम,
नज़रें चुरा के देखना, है दिल-लगी
साहिल किनारे बैठ कर पैरों तले,
पत्थर दबा के देखना, है दिल-लगी
आवाज़ दे के तीरगी में यूँ हमें,
बल्बें जला के देखना, है दिल-लगी
बातें न चाहे दिल सुने, दिल की सुनो,
दिल को लगा के देखना, है दिल-लगी
— Ranjan Kumar Barnwal















