उस एक रोज़ ये लगा कि होंगे अब जुदा नहीं
जब उसने हाथ थामकर के मुझ सेे कुछ कहा नहीं
वो मेरी ज़िन्दगी है और ज़िन्दगी है मसअला
ये मसअला भी वो कि जिसका कोई इक ख़ुदा नहीं
किसी को तो क़रीब आना लग रहा है राएगाँ
किसी को दुख ये है कि मुझ सेे राब्ता हुआ नहीं
सुने हुए मैं सारे सच भी झूठ मान लूँगा फिर
अगर जो दिल पे रख के हाथ कहदे बेवफ़ा नहीं
तुम्हें जो उस सेे दूर होने की लगी न बद्दुआ
तो सोच लेना फिर किसी से 'इश्क़ ही हुआ नहीं
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