इस तरह छोड़ कर गई मुझको
ख़्वाब तक में ना फिर दिखी मुझको
साँस लेने से डर रहा हूँ मैं
मौत लगती है ज़िंदगी मुझको
साथ कब से है मेरे तन्हाई
फिर भी तन्हा न कर सकी मुझको
सबके होते हुए अकेला हूँ
खल रही है तेरी कमी मुझको
सारी दुनिया है मेरी मुट्ठी में
बस मुहब्बत नहीं मिली मुझको
इक दिए में रखा ख़ुदा ने हमें
तुझको बाती बनाया घी मुझको
कुछ ना कुछ 'इश्क़ सबको देता है
ये उदासी इसी ने दी मुझको
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