सोचते हैं सब के वालिद अर्ज़ ज़र छत दे गए हैं
दर-हक़ीक़त वो मुझे मज़बूत क़ुव्वत दे गए हैं
पाल कर नाज़ों से अपनी बेटियों को इक पिता
शे'र बेटे की तरह पुर-ज़ोर हिम्मत दे गए हैं
सीख देकर सब्र की मज़बूत ईमाँ कर दिया पर
शौक़ देकर बादशाही शाद फ़ितरत दे गए हैं
ग़म यतीमी याद आँसू दर्द के मंज़र सभी हैं
सुन सकूँ आवाज़ उन की बस ये हसरत दे गए हैं
हम-सफ़र उन की अकेली रह गई जो बा'द उन के
फ़र्ज़ उस माँ का मुझे देकर के जन्नत दे गए हैं
— Rubball















