इक ज़ख़्म तो पहले से ही हम खाए हुए हैंऔर फिर किसी पे हज़रत-ए-दिल आए हुए हैंतू साथ है तो और ही कुछ बात है वरनापहले भी तिरे शहर में हम आए हुए हैं— Saif Dehlvi