
किसी का ख़्वाब बनना है किसी की याद बनना है
कोई शीरीं नहीं मिलती मुझे फ़रहाद बनना है
जिन्हें शागिर्द बनने का हुनर आया नहीं अब तक
ये उन की आरज़ू है अब उन्हें उस्ताद बनना है
— Saif Dehlvi
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