मैं ने तेरी जुदाई का मातम नहीं कियाभरपूर ही ये दर्द रखा कम नहीं कियाज़ख़्म ए जुदाई में मुझे दर्द ए जुदाई मेंवो लुत्फ़ आ रहा था के मरहम नहीं किया— Saif Dehlvi