मेरे दिल पर तेरी इस तरह हुकूमत हो
जैसे कजरे को बस आँखों की ज़रूरत हो
इक शाइ'र से जन्नत जा के कहना है ये
देखो मर ही जाऊँ जो तुम से फ़ुर्सत हो
सबने उस को देखा है ग़ैर की बाहों में
शायद उस चेहरे में भी मेरी सूरत हो
अब जब मिलती हूँ ख़ुद से हँस के मिलती हूँ
हो सकता है अगले पल ख़ुद से फ़ुर्क़त हो
— Sakshi Saraswat















