Sakshi Saraswat

Sakshi Saraswat

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Sakshi Saraswat shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sakshi Saraswat's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

तेरा मग़रूर हो जाना मुझे खलता नहीं लेकिन तेरी आँखों से मुझ को और कुछ मालूम होता है — Sakshi Saraswat
मेरी ग़ज़लों में लोगों को सदा दिखती है तुकबंदी मगर पन्नों पे बहते अश्क पढ़ लेती हैं दीवारें — Sakshi Saraswat
थोड़ी सिसकी थोड़ी ठिठकी पागल होना अच्छा है जग की गाथा गाने वाले तेरा रोना अच्छा है — Sakshi Saraswat
हमारे दर्मियां कुछ था नहीं जग में नुमाइश थी तेरे जाने पे फिर क्यूँँ दिल मेरा नासूर होता है — Sakshi Saraswat
मैं बे-मतलब सा इश्क़ निभाना चाहती हूँ उस की बातों से नज़्म चुराना चाहती हूँ — Sakshi Saraswat

Ghazal

तेरे हिस्से जो आए वो मेरी ख़ुशियों के प्याले हों तेरे सब ज़ख़्म ग़म हरदम यहाँ मेरे हवाले हों लिखा कुछ है नहीं अरसे से मैं ने अब ये लगता है विचारों पे मेरे शाइ'र ने पन्ने भर न डाले हों उलझती ज़िंदगी में बस मुझे इतनी रिफ़ाक़त हो मेरे अश्कों से पढ़ ले वो जो भी आँखों में नाले हों सभी ने हाल पूछा है मरीजों का यहाँ लेकिन उसे पूछा नहीं है जिस ने उस के ग़म सँभाले हों मेरी आँखें तेरे ख़्वाबों को बस इतनी सलामत दें तेरी हस्ती को इन आँखों से हरदम बस उजाले हों कभी लगते नहीं हैं बस्ते भारी उन को कंधों पर लड़कपन उम्र में जिस ने ये सारे पेट पाले हों — Sakshi Saraswat