मैं मिट जाऊँ जहाँ से गर मुझे खोया हुआ कहना
कोई आए मुझे मिलने मुझे सोया हुआ कहना
मेरी नज़्में सुनाना तुम मेरा इक गीत गा देना
मेरे आँगन की तुलसी में मुझे बोया हुआ कहना
मेरे कमरे से सारे ख़्वाब चुन बादल पे बुन देना
वो जब बरसे तो तुम उस को मेरा गोया हुआ कहना
— Sakshi Saraswat















