जो लोग हम ख़याल थे कहाँ गए किधर गएवो मेरी शाम ढल गई वो मेरे दिन गुज़र गएअसीर ए चश्म ए यार थे सो अपने साथ यूँ हुआचमक उठी तो जी उठे जो बुझ गई तो मर गए— Salman Yusuf