ऐसे इंसाँ से नाता नहीं
दिल की धड़कन जो सुनता नहीं
तुम जो मरहम करोगे तो क्या
ज़ख़्म हूँ वो जो भरता नहीं
घर के कोने में रहने तो दे
मैं तो बूढ़ा हूँ हिलता नहीं
वो अँधेरे से डरता है क्या
चाँद तन्हा वो दिखता नहीं
अब तसल्ली न आईना दे
क्यूँ मैं अब ख़ुद पे मरता नहीं
तुम जो मुझ से मिलो तो मिलूँ
मैं यूँ ख़ुद से भी मिलता नहीं
— Sanjay Bhat















