धरती की मौजूदा हालत
अपना हाल बताए कैसे
पाँव की थप थप जिस्म की हरकत
सब की राह बनाए कैसे
अपना हाल बताए कैसे
शोर मशीनों और लोगों का
अपना साज़ सुनाए कैसे
धुन जो दबी है जगाए कैसे
अपना हाल बताए कैसे
गर्द धुआँ सब घेर के बैठे
बादल फिर से बिछाए कैसे
अपना हाल बताए कैसे
सूरज है तपता ग़ुस्से में
उस की आग बुझाए कैसे
सुर्ख़ है अब आँखें भी उस की
ख़ुद को उस से छुपाए कैसे
अपना हाल बताए कैसे
घर की नहीं है मकानों की होड़
वुसअत अपनी बचाए कैसे
सिमटी शक्ल दिखाए कैसे
अपना हाल बताए कैसे
पेड़ भी काटे पर्बत तोड़े
शाख़ें तोड़ीं दरिया मोड़े
दस्त-ओ-बाज़ू बचाए कैसे
अपना हाल बताए कैसे
बढ़ते ही सारे जाते हैं
रेंगते इंसाँ रेंगते वाहन
लर्ज़िश इतनी दबाए कैसे
अपना हाल बताए कैसे
अब तो बहती नदियाँ काली
बहता ज़हर है दरिया दरिया
ख़ुद की प्यास बुझाए कैसे
अपना हाल बताए कैसे















