कल यह रिश्ता बदनाम न हो
बेहतर है इसका नाम न हो
यह सोच के उसका काम किया
कल मुझको उस सेे काम न हो
क्या आज से पीना छोड़ दिया
इस बात पे फिर क्यूँ जाम न हो
उन लबों का हश्र ख़ुदा जाने
जिन लबों पे जय श्री राम न हो
इस वक़्त को जी भर जी लो तुम
शायद फिर ऐसी शाम न हो
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