हमारे दिल में हलचल कर रहा है,
तुम्हारा इश्क़ पागल कर रहा है
कभी आगो़श में ठहरो हमारे
नदी से बात जंगल कर रहा है
किसी के शे'र आधे रह गए हैं
कोई ग़ज़लें मुकम्मल कर रहा है
— Satyam Shukla
तुम्हारा इश्क़ पागल कर रहा है
कभी आगो़श में ठहरो हमारे
नदी से बात जंगल कर रहा है
किसी के शे'र आधे रह गए हैं
कोई ग़ज़लें मुकम्मल कर रहा है
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