दिल की दुनिया में कोई आग लगाने आयाएक जंगल हुई बस्ती को जलाने आयाएक कमज़र्फ़ को भेजा था दुआएँ देकरएक कमज़र्फ़ मुझे फिर से सताने आया— Satyawesh Niraj