ये सोच कर हम प्यार में आए

रुतबा मेरा दो चार में आए

मसरूफ़ियत में चूर है दुनिया
हम तो यहाँ बेकार में आए

पूरे जहाँ में धूम कर डाली
जब सरफिरे किरदार में आए

आवाज़ हक़ की जिन गलों से थी
वो ही गले तो दार में आए

बर्बाद हम को जिस ने कर डाला
क्यूँ याद वो हर बार में आए

— SHABAN NAZIR

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