aasaishon se door hai gurbat ke paas hai | आसाइशों से दूर है ग़ुर्बत के पास है

  - Shajar Abbas

आसाइशों से दूर है ग़ुर्बत के पास है
इक फूल जैसा जिस्म है जो बे लिबास है

हम जो हैं यार गुलशन-ए-ग़ुर्बत के फूल हैं
ग़म खा के मुस्कुराना मियाँ हमको रास है।

तेरी उदासी देख के ऐ मेरे हमनशीं
मुझको ये लग रहा है ज़माना उदास है

आग़ोश-ए-मुफ़लिसी में बसर कर दी ज़िन्दगी
आग़ोश-ए-चैन-ओ-ऐश कहाँ हमको रास है।

इक अरसे से ख़ुदा की क़सम हर घड़ी शजर
दिल को तुम्हारे लौट के आने की आस है

  - Shajar Abbas

Dard Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Shajar Abbas

As you were reading Shayari by Shajar Abbas

Similar Writers

our suggestion based on Shajar Abbas

Similar Moods

As you were reading Dard Shayari Shayari