haq-o-baatil ki jo pahchaan nahin kar sakte | हक़-ओ-बातिल की जो पहचान नहीं कर सकते

  - Shajar Abbas

हक़-ओ-बातिल की जो पहचान नहीं कर सकते
ख़ुद को वो साहिब-ए-ईमान नहीं कर सकते

जान-ए-मन जान-ए-वफ़ा जान नहीं कर सकते
ज़ुल्फ़ को तेरी परेशान नहीं कर सकते

ऐ मेरी चाक गिरेबानी पे हँसने वालो
क्या रफू मेरा गिरेबान नहीं कर सकते

बेवफ़ा शख़्स मेरे दिल में ख़ुदा रहता है
तुम मेरे दिल का यूँँ अपमान नहीं कर सकते

आपका 'इश्क़ कभी 'इश्क़ नहीं हो सकता
आप गर 'इश्क़ का ऐलान नहीं कर सकते

हम रखेंगे सदा भगवान को भगवान सुनो
हम सनम को कभी भगवान नहीं कर सकते

जान कह कह मुझे आपनी बुलाते थे सदा
अब शजर तुम मुझे अनजान नहीं कर सकते

  - Shajar Abbas

Udas Shayari

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