nauha kunaan zamaane ka har khaas-o-aam hai | नौहा कुनाँ ज़माने का हर ख़ास-ओ-आम है

  - Shajar Abbas

नौहा कुनाँ ज़माने का हर ख़ास-ओ-आम है
क़ल्ब-ए-शजर भी देखिए ज़िंदान-ए-शाम है

ज़ालिम की वो करेगा हिमायत जहान में
जिसके शिकम में दोस्तों माल-ए-हराम है

दस्त-ए-अदब को जोड़े हुए सर को ख़म किए
दरबार-ए-बादशाह में हाज़िर गुलाम है

मज़लूम-ओ-बेकसों की हिमायत में है खड़ा
जज़्बे को नौजवाँ तेरे दिल से सलाम है

सेहराब हो रहा है जहाँ तेरे आब से
बस इक शजर है दुनिया में जो तश्ना काम है

  - Shajar Abbas

Shajar Shayari

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