na ujde aise kisi ka mere khuda gulshan | न उजड़े ऐसे किसी का मेरे ख़ुदा गुलशन

  - Shajar Abbas

न उजड़े ऐसे किसी का मेरे ख़ुदा गुलशन
के जैसे उजड़ा है मेरा हरा भरा गुलशन

बयान कर के जनाज़े पे रो रहा है कोई
तुम्हारे होने से आबाद था मेरा गुलशन

उदास कलियाँ हुईं तितलियों ने हिजरत की
ले मिस्ल-ए-दश्त-ए-जुनूँ हो गया सबा गुलशन

चमन में करती नहीं तितलियाँ गुलों का तवाफ़
ख़िज़ाँ ने लूट लिया किब्रिया हरा गुलशन

शजर की छाँव शजर पर समर शजर ना रहा
तमाम हो गया इक रात में फ़ना गुलशन

  - Shajar Abbas

Mood off Shayari

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