मुझ पर निगाह-ए-नाज़ का जब जादू चल गयामैं रफ़्ता रफ़्ता क़ैस की सोहबत में ढल गयाज़ुल्फें उन्होंने खोल के बिखराई थी शजरफिर देखते ही देखते मौसम बदल गया— Shajar Abbas