vo shajju kah ke sadaa paas men bulaati thii | वो शज्जू कह के सदा पास में बुलाती थी

  - Shajar Abbas

वो शज्जू कह के सदा पास में बुलाती थी
फिर उसके बाद गले से मुझे लगाती थी

सहेली उसको मेरे नाम से चिढ़ाती थी
वो मेरे नाम पे शर्मा के मुस्कुराती थी

मैं अपनी ग़ज़लों में सब उसका हुस्न लिखता था
सहेलियों को वो ग़ज़लें मेरी सुनाती थी

मैं रोज़ उसकी गली से गुज़र के जाता था
वो मुझको देखने खिड़की पे अपनी आती थी

हिना से अपनी हथेली पे वो शजर लिखकर
लबों से चूमती थी सखियों को दिखाती थी

  - Shajar Abbas

Taareef Shayari

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