जब से हमने तेरी जानी है हक़ीक़त ज़िंदगी
तब से तू लगने लगी है इक अज़िय्यत ज़िंदगी
तूने मुझसे छीन ली ख़ुशियों की दौलत ज़िंदगी
तू बता कैसे करूँँ तुझसे मोहब्बत ज़िंदगी
हाल पर दुनिया किया करती है हैरत ज़िंदगी
तूने ये कैसी बना डाली है हालत ज़िंदगी
पहले मैं करता था रब से तेरी चाहत ज़िंदगी
अब तो तेरे नाम से होती है हैबत ज़िंदगी
रब से यूँँ माँगा था मैंने तुझको अपने वास्ते
मैं समझता था तू होगी ख़ूबसूरत ज़िंदगी
ख़ुदकुशी करने चला है इक जवाँ ये बोलकर
दे रहा हूँ तुझको मैं थोड़ी सी ज़हमत ज़िंदगी
चैन से सोऊँगा मैं अब मौत की आग़ोश में
तूने इक पल भी नहीं दी मुझको राहत ज़िंदगी
अपने होंठों को तबस्सुम की रिदा से ढाँप लूँ
बस अता कर दे मुझे तू इतनी मोहलत ज़िंदगी
सह रहा हूँ मैं मुसलसल हर अज़िय्यत हर सितम
दाद दे तू देखकर मेरी शराफ़त ज़िंदगी
इस से बढ़कर मैं तिरे बारे में आख़िर क्या कहूँ
मुझ पे उतरी है तू बन के ग़म की आयत ज़िंदगी
चल नहीं सकता मैं तेरे साथ में अब दो क़दम
तूने इतनी तोड़ दी है मेरी हिम्मत ज़िंदगी
मुझसे जब पूछा गया ये ज़िंदगी क्या चीज़ है
मैंने ये बोला मुसीबत है मुसीबत ज़िंदगी
मौत जब करने को आएगी अयादत देखना
मौत से तेरी करूँँगा मैं शिकायत ज़िंदगी
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