jab se hamne teri jaani hai haqeeqat zindagi | जब से हमने तेरी जानी है हक़ीक़त ज़िंदगी

  - Shajar Abbas

जब से हमने तेरी जानी है हक़ीक़त ज़िंदगी
तब से तू लगने लगी है इक अज़िय्यत ज़िंदगी

तूने मुझसे छीन ली ख़ुशियों की दौलत ज़िंदगी
तू बता कैसे करूँँ तुझसे मोहब्बत ज़िंदगी

हाल पर दुनिया किया करती है हैरत ज़िंदगी
तूने ये कैसी बना डाली है हालत ज़िंदगी

पहले मैं करता था रब से तेरी चाहत ज़िंदगी
अब तो तेरे नाम से होती है हैबत ज़िंदगी

रब से यूँँ माँगा था मैंने तुझको अपने वास्ते
मैं समझता था तू होगी ख़ूबसूरत ज़िंदगी

ख़ुदकुशी करने चला है इक जवाँ ये बोलकर
दे रहा हूँ तुझको मैं थोड़ी सी ज़हमत ज़िंदगी

चैन से सोऊँगा मैं अब मौत की आग़ोश में
तूने इक पल भी नहीं दी मुझको राहत ज़िंदगी

अपने होंठों को तबस्सुम की रिदा से ढाँप लूँ
बस अता कर दे मुझे तू इतनी मोहलत ज़िंदगी

सह रहा हूँ मैं मुसलसल हर अज़िय्यत हर सितम
दाद दे तू देखकर मेरी शराफ़त ज़िंदगी

इस से बढ़कर मैं तिरे बारे में आख़िर क्या कहूँ
मुझ पे उतरी है तू बन के ग़म की आयत ज़िंदगी

चल नहीं सकता मैं तेरे साथ में अब दो क़दम
तूने इतनी तोड़ दी है मेरी हिम्मत ज़िंदगी

मुझसे जब पूछा गया ये ज़िंदगी क्या चीज़ है
मैंने ये बोला मुसीबत है मुसीबत ज़िंदगी

मौत जब करने को आएगी अयादत देखना
मौत से तेरी करूँँगा मैं शिकायत ज़िंदगी

  - Shajar Abbas

Maut Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Shajar Abbas

As you were reading Shayari by Shajar Abbas

Similar Writers

our suggestion based on Shajar Abbas

Similar Moods

As you were reading Maut Shayari Shayari