सबक़ वफ़ा का पढ़ाना तुम अपने बेटे को
हमारे जैसा बनाना तुम अपने बेटे को
हर एक बुज़ुर्ग का दुनिया के एहतराम करे
अदब नवाज़ उठाना तुम अपने बेटे को
जो पूछे कौन तुम्हें सब से बढ़ के चाहता था
तो नाम मेरा बताना तुम अपने बेटे को
अगर ऐ जान जो दुनिया से मैं गुज़र जाऊँ
तो मेरी क़ब्र पे लाना तुम अपने बेटे को
वो तुम से रूठे अगर तो मना लिया करना
मेरी तरह न सताना तुम अपने बेटे को
किसी की जान की ऐ जान तुम इधर आओ
ये कहके पास बुलाना तुम अपने बेटे को
ऐ शाहज़ादी हर एक रात गाके लोरी में
हमारी ग़ज़लें सुनाना तुम अपने बेटे को
हर एक लड़की का दुनिया की एहतराम करे
शऊर इतना सिखाना तुम अपने बेटे को
जहाँ जहाँ पे मुलाक़ात होती थी अपनी
हर उस जगह पे घुमाना तुम अपने बेटे को
वो घर से निकले तो दम करना उस पे नाद-ए-अली
यूँ नज़र-ए-बद से बचाना तुम अपने बेटे को
हर एक शब ऐ मेरी शाहज़ादी याद रहे
शजर की ग़ज़लें पढ़ाना तुम अपने बेटे को















