याद रखना इलाहाबाद में तुम
क़त्ल हो जाओगे फ़साद में तुम
मुझको ये ख़्वाब रोज़ आता है
ख़ुश नहीं रहते मेरे बाद में तुम
मर गए सारे मेरे यार-ए-अज़ीज़
रह गए मेरी कल मुराद में तुम
मुझको बाद-ए-सबा बताती है
खोए रहते हो मेरी याद में तुम
कर गया ग़श वो इतना कहके शजर
कैसे रहते हो इन्फ़िराद में तुम
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