ज़िंदगी तुझसे ख़फ़ा हैं ये बताएँ किसको
अब बता हमको भला सीने लगाएँ किसको
सोचते रहते हैं ये बैठ के तन्हाई में
किससे हो जाएँ ख़फ़ा और मनाएँ किसको
आपके वास्ते ग़ज़लें जो लिखी हैं हमने
आपके बाद वो बतलाओ सुनाएँ किसको
ये बता आज भला किसको निकालें दिल से
ये बता आज भला दिल में बसाएँ किसको
सब यहाँ बेहिस-ओ-कमज़र्फ नज़र आते हैं
हम शजर अपना बनाएँ तो बनाएँ किसको
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