हम हैं हद से गुज़रने वाले लोग
राह-ए-उलफ़त में मरने वाले लोग
हौसला मेरा कैसे तोड़ेंगे
ये मिरे पर कतरने वाले लोग
मौत से हम तो 'इश्क़ करते हैं
और होंगे वो डरने वाले लोग
मशवरा अपना साथ ले जाओ
हम नहीं हैं सुधरने वाले लोग
देख लो सब हमीं से होते हैं
डूब कर फिर उभरने वाले लोग
बह गए साथ साथ लहरों के
आब दरिया से भरने वाले लोग
किस लिए ये हयात हैं अब तक
मेरे दिल से उतरने वाले लोग
क्यूँ जहाँ से गुज़र नहीं जाते
वादे कर के मुकरने वाले लोग
अब ज़माने में कम ही मिलते हैं
चाय से 'इश्क़ करने वाले लोग
पूछता रह गया शजर सब से
चल पड़े क्यूँ ठहरने वाले लोग
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