अज़ीज़ लोगों ने क्या ख़ूब तर कमाल कियाबतौर-ए-तोहफ़ा मुझे ग़म दिए निढाल कियाफिर उस के बा'द चले आए ताज़ियत करनेमिरे गले से लगे बैठ कर मलाल किया— Shajar Abbas