सामने आँखों के ये कैसी कहानी आ गईइश्क़ के ख़ामोश दरिया में रवानी आ गईबारगाह-ए-रब में यूसुफ़ हो गए महव-ए-दु'आदफ़अ'''तन बूढ़ी ज़ुलैख़ा पर जवानी आ गई— Shajar Abbas