किरदार देखे हम ने बा-किरदार के
वो शख़्स कल पीछे दिखा दीवार के
ख़ुद को बताते हैं जो बा-किरदार से
बद-कारी देखी उन के भी किरदार के
इंसाँ के रग से खूँ बहाए जिस ने कल
डर तक न थी चेहरे पे उस ख़ूँ-ख़ार के
मुस्कान छीनी उस ने ही लब से मिरे
नग़्में सुनाता था मैं जिन को प्यार के
— Shams Amiruddin















