ज़िंदगी ये थी जिस के लिए
तुम ही तुम थी वो मेरे लिए
क्या ज़माना था वो तुम भी जब
माँगे थे ख़ुद को मेरे लिए
मुद्दतों से कई मैं ने भी
जो किया कुछ न तेरे लिए
इक दुआ माँगी है इस लिए
ख़ुश रहो तुम सदा के लिए
माँग लो तुम ख़ुदा से कभी
अब दुआ एक ख़ुद के लिए
हो भी पूरी ये ख़्वाहिश तिरी
जो मैं मर जाऊँ तेरे लिए
— Shams Amiruddin















