यूँँ मोहब्बत की क़सम खा बिछड़े वहाँइक अलग दुनिया बसाई हम ने जहाँमुझ से डरती है मेरी परछाई भी अबसो है मेरे साथ बस तन्हाई यहाँ— Shams Amiruddin