बताते हैं बताएँगे मुझे इक दिन
तड़प क्या है दिखाएँगे मुझे इक दिन
यूँ लगता है बड़ा ही नासमझ हूँ मैं
सभी समझा के जाएँगे मुझे इक दिन
हमारा वास्ता जिस शख़्स से भी है
बिछड़ कर सब रुलाएँगे मुझे इक दिन
क़रीबी मेरे मुफ़्लिस होने पर मेरे
पता है छोड़ जाएँगे मुझे इक दिन
जो बेहद ख़ास है इस बे-सुकूँ दिल के
वही अब रौंद जाएँगे मुझे इक दिन
— Shams Amiruddin















