खेल सारा ही फ़क़त क़िस्मत का है जाँख़त्म होती है यहाँ सारी दास्ताँइश्क़ में मिलना मुक़द्दर है वर्ना तोमिट गए हैं इश्क़ के कितने ही निशाँ— Shams Amiruddin