मेरे दिल का बिखरा हुआ हाल मुझ को
हर इक रोज़ करता है पामाल मुझ को
तेरे साथ फिर से बिताने हैं वो पल
तेरे साथ तस्वीर में डाल मुझ को
वो इतना हसीं था उसे भूलने में
लगेंगे कम-अज़-कम भी दस साल मुझ को
नहीं जानता अपने आमाल को मैं
मगर जानते हैं ये आमाल मुझ को
किसी ने गले से लगा रक्खा था और
किसी ने तो दी अपनी ही शॉल मुझ को
जहाँ से मेरे ज़ख़्म भरने लगे थे
वहीं से किया उस ने पामाल मुझ को
— Asad Khan















