एक तुम मौजूद हो बस शामियाने आज की रात

कौन है मेरा यहाँ आए दिखाने आज की रात

है नज़र आया कि तुम क्या हो जिगर में रहने वालों
दोस्त मेरे आए तुम ख़ंजर चलाने आज की रात

मिल्कियत है चाँद-तारों से भरी पर सब चले हैं
आसमाँ के चाँद को छूने-चुराने आज की रात

दिल न रोया था कभी पहले किसी ग़म के बहाने
मुझ को रोना है शब-ए-ग़म के बहाने आज की रात

काँच का पैकर ये दिल फिर आरज़ू का रक़्स उस पर
आरज़ूओं के सितम भी हैं उठाने आज की रात

— Shekhar Mandal

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Zakhm Shayari

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