इश्क़ है दर्द भी रुसवाई भी
ये ज़रा सा है तमाशाई भी
ये मोहब्बत तो अता करती है
जान-ए-जाँ थोड़ी सी तन्हाई भी
तेरी आहट है अभी तक ज़िंदा
सच है लेकिन है ये दुख-दाई भी
बस ख़ुशी की ही तमन्नाई क्यूँ
थोड़े दुख की हो पज़ीराई भी
आ कभी तू मिरे दर पे वर्ना
रूठ जाएगी ये बीनाई भी
— Shekhar Mandal















