dil ko kisi bhi shaam machalne nahin diya | दिल को किसी भी शाम मचलने नहीं दिया

  - shaan manral

दिल को किसी भी शाम मचलने नहीं दिया
तन्हाइयों के रंग में ढलने नहीं दिया

मैं हो गया हूँ क़ैद हज़ारों रिवाज़ में
मुझको मिरी ही ज़ात ने फलने नहीं दिया

दिल हिज्र में मचल तो रहा है बहुत मगर
दिल से ख़याल-ए-वस्ल निकलने नहीं दिया

था हर क़दम क़दम पे मिरा इम्तिहान और
मैं ने भी इम्हितान को टलने नहीं दिया

उस के हज़ारों रूप मैं ने देखे हैं तभी
उस की किसी भी बात को चलने नहीं दिया

  - shaan manral

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