sab ko paar utar jaana hai meraa hai ghar paani men | सब को पार उतर जाना है मेरा है घर पानी में

  - Shivam chaubey

सब को पार उतर जाना है मेरा है घर पानी में
मेरे सपने मेरी नींदें मेरा बिस्तर पानी में

तुमको पाने की ख़्वाहिश इन आँखों में यूँँ डूबी है
डूब रहे हों जैसे सारे कंकड़ पत्थर पानी में

हाथ छुड़ाकर जाने वाले तुमको ये समझाए कौन
बिन चप्पू के खो जाती हैं नावें अक्सर पानी में

जाने क्या ही खोज रही है जाने क्या ही खोया है
कश्ती क्योंकर घूम रही है इतने चक्कर पानी में

यूँँ ही नहीं मैं जलपरियों की राहें तकता रहता हूँ
शायद इक दिन तुम भी आओ भेस बदलकर पानी में

  - Shivam chaubey

Kashti Shayari

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