चश्म हैं दर दर क़ना'अत में नहीं
आज के आशिक़ ये उल्फ़त में नहीं
आज इस सेे प्यार कल उस सेे वफ़ा
आजकल कोई मुहब्बत में नहीं
शाद करने में लगी हैं बेेश शय
शाद बस मैं तेरी सोहबत में नहीं
जो मज़ा है 'इश्क़ करने में तुझे
वो मज़ा रब की इबादत में नहीं
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