चश्म हैं दर दर क़ना'अत में नहीं
आज के आशिक़ ये उल्फ़त में नहीं
आज इस से प्यार कल उस से वफ़ा
आजकल कोई मुहब्बत में नहीं
शाद करने में लगी हैं बेश शय
शाद बस मैं तेरी सोहबत में नहीं
जो मज़ा है इश्क़ करने में तुझे
वो मज़ा रब की इबादत में नहीं
— Sohit Singla















