आँखों से गिर के अश्क बहने लगे
बाढ़ आई तो बाँध ढहने लगे
इक नदी सूखी जब कटा जंगल
लोग सूखी नदी में रहने लगे
है जो सूरज का चाँद से रिश्ता
चाँदनी सब उसी को कहने लगे
जब भी तारीफ़ इश्क़ ने की है
हुस्न को लफ़्ज़, सारे गहने लगे
रूह अब तुझ में बस गई मेरी
दर्द जो तू ने बख़्शे सहने लगे
— Sonia rooh















