dil bhi lag jaata par laga hi nahin | दिल भी लग जाता पर लगा ही नहीं

  - BR SUDHAKAR

दिल भी लग जाता पर लगा ही नहीं
जिसको चाहा कभी मिला ही नहीं

वो मुझे छोड़ के चला भी गया
पर ये दिल है के मानता ही नहीं

मैं ही, उसको भुला न पाया और
मैने सोचा कि रास्ता ही नहीं

उसकी चाहत थी कि तड़पता रहूँ
फिर दिल-ए-ज़ख्म,मैं सिला ही नहीं

शोर करता है, वो निभाएगा साथ
और ज़रूरत पे, वो दिखा ही नहीं

सब दिया है ख़ुदा ने, ख़ुश भी हूँ
एक बस यार, तू मिला ही नहीं

दूर के लोग तेरे अपने हुए
पास का मैं तेरा हुआ ही नहीं

सज के कॉलेज में आना क्या मतलब
तू मेरी ओर देखता ही नहीं

प्यार खोजे 'सलीम' शहर में वो
थक गया पर कहीं दिखा ही नहीं

  - BR SUDHAKAR

Khuda Shayari

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