हम दोनो घर चल देंगे

हाथ पकड़ कर रख मेरा
सर सीने पर रख
मेरा यक़ीन तू कर,
तू कहीं जाने वाला नहीं है
वेंटिलेटर कम पड़ जाए तो क्या ?
अपने हाथों को वेंटिलेटर, मैं बना दूँगा
मैं तेरी सांसो की ख़ातिर सच में सनम
मैं अपनी सांसे तक गिरवी रख दूँगा
मैं रब से झगड़ा कर लूंगा
पर कैसे भी मैं तुझ को जाने नहीं दूँगा
तू घबरा मत सब कुछ ठीक हो जाएगा
जैसे पहले था सब वैसा हो जाएगा
तू रो मत इतनी सी तो बात है, और
इतना कुछ तो हम ने साथ में झेला है
और फिर इक दिन ये भी दुख चला जाएगा
ऐसा समझो हम एक जंग में है
ऐसा जानो हम जीतेंगे
बस तू अपना हौसला मत जाने देना
बाकी तो तू मुझ पर छोड़ दे सब कुछ
मैं हूँ ना !!
क्यूँ फिक्र तू करती है ?
जैसे कट जाता है हर इक दिन
वैसे ये दिन भी कट जाएगा
ये अँधेरा धीरे-धीरे हट जाएगा
फिर से सहर होगी
हमनें कितना कुछ जीना है अभी तो
अपना वेट भी करता होगा, घर अपना
तेरी बातों में फिर से खोना है मुझे
तेरे साथ अभी कितना हँसना है मुझे
मैं ने तेरे हाथों का खाना फिर से खाना है
तू टेंशन मत रख
हम जल्दी ही घर चल देंगे
तुझ को कुछ नहीं होगा
बस कुछ दिन की बात है फिर
हम दोनो घर चल देंगे

— BR SUDHAKAR

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