तू देख अपने बीच में क्या क्या बदल गया

इतना बदल गया है कि रिश्ता बदल गया

मैं जब भी उस को देखता हूँ सोचता हूँ ये
वो शख़्स मेरी सोच से कितना बदल गया

बदलाव चाहता था मैं ख़ुद में इधर उधर
थोड़ा बदलना चाहा ज़ियादा बदल गया

जितना बदल के बात को बोला है आपने
मतलब हमारी बात का उतना बदल गया

नाराज़गी है आप को या हैं शिकायतें
ये क्या जो बात बात पे लहजा बदल गया

मेरा बदलना आप को लाज़िम नहीं लगा
ख़ुश हो के बोलते थे ज़माना बदल गया

— Sunny Seher

More by Sunny Seher

Other ghazal from the same pen

See all from Sunny Seher →

Behan Shayari

Shers of behan.

All Behan Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling