तजुर्बा होता ये सब होने से पहले

तुझे पा लेते तेरे खोने से पहले

मुकम्मल मौत भी तो आज है मेरी
किए हैं काम सारे सोने से पहले

कभी यूँ ज़िक्र तो छेड़ा नहीं फिर भी
कोई तो होगा मेरे होने से पहले

ये फ़ितरत इस तरह बदली कि हम दोनों
बहुत हँसने लगे थे रोने से पहले

न लाओ कोई मरहम या दवा कोई
सहर भी मर गया ग़म ढोने से पहले

— Sunny Seher

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Udasi Shayari

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