मशवरा तो दे रहा हूँ यार को
ख़ुद नहीं समझा हूँ अब तक प्यार को
आप जैसे ही भले दो चार लोग
मिलते जुलते हैं यहाँ इतवार को
तेज़ बारिश है कि तुम अंदर रहो
सब हिदायत दे रहे बीमार को
लूट चोरी औ डकैती से भरी
ख़बरें खाती जा रहीं अख़बार को
एक हिस्सा गिर गया तो घर गया
कोई जाकर थाम ले दीवार को
मर गया तो फिर कहानी ख़त्म है
हर कहानी में भरम किरदार को
दिल लगाना इसलिए अच्छा नहीं
दर्द मिलता है यहाँ दिलदार को
चाँद छूने की लगी जो शर्त फिर
छू लिया है उसके ही रुख़सार को
नफ़रतें बो दीं किसी ने बाग़ में
फूल गाली दे रहे हैं ख़ार को
जीत जाना ही भला क्या जीत है
जीत मिलती है हमेशा हार को
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