mashwara to de raha hooñ yaar ko | मशवरा तो दे रहा हूँ यार को

  - Sunny Seher

मशवरा तो दे रहा हूँ यार को
ख़ुद नहीं समझा हूँ अब तक प्यार को

आप जैसे ही भले दो चार लोग
मिलते जुलते हैं यहाँ इतवार को

तेज़ बारिश है कि तुम अंदर रहो
सब हिदायत दे रहे बीमार को

लूट चोरी औ डकैती से भरी
ख़बरें खाती जा रहीं अख़बार को

एक हिस्सा गिर गया तो घर गया
कोई जाकर थाम ले दीवार को

मर गया तो फिर कहानी ख़त्म है
हर कहानी में भरम किरदार को

दिल लगाना इसलिए अच्छा नहीं
दर्द मिलता है यहाँ दिलदार को

चाँद छूने की लगी जो शर्त फिर
छू लिया है उसके ही रुख़सार को

नफ़रतें बो दीं किसी ने बाग़ में
फूल गाली दे रहे हैं ख़ार को

जीत जाना ही भला क्या जीत है
जीत मिलती है हमेशा हार को

  - Sunny Seher

Dard Shayari

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