hamne supurdagi men kya kya nahin kiya hai | हमने सुपुर्दगी में क्या क्या नहीं किया है

  - Sunny Seher

हमने सुपुर्दगी में क्या क्या नहीं किया है
बदले में क्या मिला है शिक़वा नहीं किया है

यूँँ शौक़ तो हमारे परवाज़ पे हैं सारे
शौक़ीनियत के चलते क़र्ज़ा नहीं किया है

हो जाए वो किसी का जिसका भी होना चाहे
वो प्यार है हमारा दावा नहीं किया है

हर बात तेरी मानी तू चाहता था जैसा
मैं चाहता था जैसा वैसा नहीं किया है

जब जब तुम्हारे लब से सुनता हूँ उसकी बातें
तब तब तुम्हारे लब पर बोसा नहीं किया है

मेरी तमाम सिगरिट जल जल के बुझ रही हैं
हाथों से तुमने अपने साया नहीं किया है

वो जिस ग़ज़ल में उसका ज़िक़्र-ओ-ख़याल आया
हमने भी उस ग़ज़ल का मक़्ता नहीं किया है

  - Sunny Seher

Lab Shayari

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