"हम सफ़र"

ना वक़्त रुकता है और ना वो
बस बढ़ते ही जा रहे है सनम
मंज़िल का पता नहीं
पर लाज़िमी है कि
सफ़र जारी रखें उन के क़दम
इस लिए चले जा रहे हैं
आगे आगे बहुत आगे

चिंताएँ अक्सर उभर आती हैं
उन के ललाट पर
आड़ी-तिरछी रेखाओं के रूप में
होंठ ख़ामोश रहते है अक्सर उन के
चेहरे पर फीकी मुस्कान लिए
वो फ़िक्र-मंद रहते है अक्सर
आने वाले कल के लिए
इस सोच से परे कि
क्या सहेज रहे हैं वो आज के लिए

सब कुछ सहेज लेना चाहते हैं
पास अपने समेट लेना चाहते हैं
कल के भविष्य निर्माण में जुटे हैं
आज को न्यौछावर कर
समर्पित पूर्ण समर्पित

— Tarun Bharadwaj

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